Satya Dharam Bodh Mission

7. स्वदेश के सम्बन्ध में “विज्ञान मूलक सत्य धर्म प्रवर्तक भगवान देवात्मा” की धर्म-शिक्षा —

7.  भगवन फरमाते हैं, कि प्रत्येक जन को चाहिए कि वह अपने देश की विविध प्रकार की हितकर वस्तुओं के विषय मे ज्ञान लाभ करके उसके अर्थात अपने देश के साथ अपने हार्दिक सम्बन्ध को अधिक से अधिक उन्नत करे ।

प्रिय मित्रो ! हमारा देश सदियों से गुलाम रहा है । आज भी देश के अंदर तथा बाहर हम चारों ओर से शत्रुओं से घिरे हुए हैं । जिस क़ौम में राष्ट्र-प्रेम नहीं होता, वह टूट जाती है, बर्बाद हो जाती है, मिट जाती है । यदि हमने राष्ट्र-प्रेम की ज्वलन्त उदाहरण देखनी हो, तो जापानियों तथा इसराइलियों में देखें, तभी हमें राष्ट्र-प्रेम का थोड़ा सा अनुमान हो सकता है । हमारा भारत-वर्ष कभी बृह्मा से लेकर अफगानिस्तान तक था, जो आज तक टूट-टूटकर छोटा और छोटा होता जा रहा है । इसका मुख्य कारण यही है, कि हम भीड़ तो बन गए लेकिन एक क़ौम नहीं बन सके, एक राष्ट्र नहीं बन सके ।

काश ! हमारी तथा हमारे राष्ट्र की सब वर्कर से रक्षा तथा विकास हो ।

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